कर्ण की मृत्यु कैसे हुई थी,

कन्नू और अर्जुन के युद्ध के समय जिस टाइम पर करण अपनी पूरी धनुर विद्या भूल गया था, तो उस टाइम पर अर्जुन ने अपने धनुष से अंजलि अस्त्र का इस्तेमाल कर करन का वध कर दिया था और अंजलि अस्त्र के प्रहार से करण भूमि पर गिर गया था और पूरा लहू लुहान हो गया था लेकिन उसके बाद भी उसकी मृत्यु नहीं हो पा रही थी तो उस टाइम पर अर्जुन ने भगवान कृष्ण से पूछा कि करन की मृत्यु क्यों नहीं हो रही तो भगवान ने कहा कि करण ने जीवन भर जो भी उसके द्वारा पर आया है सबको दान दिया है जैसे कि देवराज इंद्र ने करण से उसका कवच और कुंडल मांगा था और उसने अपने दान देने के प्रण का मान रखा और कवच कुंडल दान में दे दिया तो इसी तरह उसके दान का उसके पास बहुत पुण्य है, इसीलिए उसकी मृत्यु के समय उसकी रक्षा स्वयं धर्मदेव कर रहे थे तो उस टाइम पर एक साधु ने करन की मृत्यु के टाइम पर आकर उससे उसका सारा पुण्य मांग लिया तो उसने दान में दे दिया था उसके बाद उसकी मृत्यु हो पाई थी,

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