गौतम बुद्ध ने संन्यास क्यों लिया था, गौतम बुद्ध ने घर क्यों छोड़ा था

गौतम बुद्ध को रास्ते में कौन से तीन दुखियारे मिले थे, गौतम बुद्ध ने व्यक्ति के जीवन में कौन से दुख देखे थे

गौतम बुद्ध ने संन्यास क्यों लिया था – एक बहुत बड़े राजा के पुत्र होने के बाद भी गौतम बुद्ध ने सारा राज पाठ सारी संपत्ति छोड़कर अपने घर का त्याग करके जंगल में जाकर क्यों निवास करने लगे थे गौतम बुद्ध कितने महान इंसान थे यह तो सभी लोग जानते हैं हम आपको बताएंगे कि उनके घर छोड़ने के बड़े-बड़े क्या कारण थे और जैसे कि आपको मालूम होगा जिस दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था उसी दिन उनकी मृत्यु हुई थी उसी दिन उन्होंने संसार को अलविदा कहा था और उसी दिन उन्होंने ज्ञान की प्राप्ति की थी जो दिन पूर्णिमा का था

गौतम बुद्ध को कौन से दुखियारे व्यक्ति मिले थे जिसेसे उन्होंने घर छोड़ने का मन बनाया

गौतम बुद्ध एक बार अपने रथ पर सवार होकर आसपास अपना एरिया घूमने निकले उसे टाइम पर उनको सबसे पहले एक बूढ़ा व्यक्ति नजर आया जिसके पूरे मुंह और बदन पर झुर्रियां थी और उसकी खाल लटक रही थी, उसके पूरे बाल सफेद थे दांत भी टूट चुके थे और वह एकदम कमजोर सा ऐसा दिख रहा था और उसका शरीर कांप रहा था, उसे टाइम पर गौतम बुद्ध ने सोचा कि दुनिया में इस तरह के कितने बूढ़े कमजोर लाचार व्यक्ति होंगे वह कितना दुख झेल रहेंगे तो गौतम बुद्ध को उसे व्यक्ति पर बहुत दया आई थी,

थोड़ा घूमने के बाद बुद्ध को एक जबान उम्र का युवक मिला जो की एक बीमार था और अपनी बीमारी के कारण वे व्यक्ति एकदम दुबला पतला दिख रहा था उसके अंदर का पूरा रक्त सूख गया था और उसकी बीमारी की तकलीफ दुख दर्द उसके चेहरे पर झलक रहा था, तो गौतम बुद्ध को लगा हर उम्र के व्यक्ति बीमार हो जाते हैं और दुख तकलीफ झेलते हैं इस तरह के भी कई सारे व्यक्ति संसार में मौजूद है जो कि इस तरह का दुख अपने जीवन में लेकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं,

थोड़ा आगे चलकर गौतम बुद्ध को एक व्यक्ति का सब मिला जिसके पीछे कहीं सारे लोग उसकी अंतिम यात्रा में उसके साथ चल रहे हैं और उसे व्यक्ति के घर वाले माता ठोक ठोक कर आंसू बहा कर रो रहे हैं गौतम बुद्ध को उसे टाइम पर भी संसार में एक बहुत बड़ा दुख देखने को मिला जो की कई सारे लोग अपने जीवन में भोगते हैं

और इन तीनों के बाद आगे चलकर गौतम बुद्ध को एक संन्यासी व्यक्ति नजर आया जो कि अकेला था बिना किसी अच्छे वस्त्र बिना किसी आभूषण बिना किसी बीमारी बिना किसी लालसा बिना किसी परिवार के साथ केवल अकेला था और उसके चेहरे पर मुस्कान थी उस व्यक्ति के जीवन से गौतम बुद्ध आकर्षित हुए, उनको उसे सन्यासी व्यक्ति के जीवन में यह मिला कि इसके मन मे दूसरे व्यक्ति के लिए कोई कपट किसी चीज लालच मोह नहीं है यह सब कुछ छोड़ चुका है सारे रिश्तों को त्याग चुका है केवल सन्यास धारण करके आत्म मुक्ति के मार्ग पर निकल पड़ा है तो उस टाइम गौतम बुद्ध को सन्यास धारण करने की इच्छा मन में जागी और संसार मे व्यक्ति के जीवन मे उसकी बीमारी उसका बुढापा उसकी मृत्यु इन सब के बारे में जानने के लिए अपने घर का त्याग करके आत्म मुक्ति के मार्ग पर चल दिए और जीवन का सत्य क्या है यह जानने के लिए अपने घर परिवार को छोड़ दिए

गौतम बुद्ध का छोटा परिचय जानिए

गौतम बुद्ध के के बचपन का नाम सिद्धार्थ था जो कि बड़े होने तक रहा और बाद में इनको गौतम बुद्ध कहा गया इनके पिता का नाम सुडोढन तथा जन्म देने वाली माता का नाम माया देवी था लेकिन उनके जन्म की एक हफ्ते बाद ही उनकी माता की मृत्यु हो गई थी उसके बाद इनको इनकी सौतेली मां ने पाल पॉस्कर बड़ा किया था, गौतम बुद्ध का विवाह इनकी 16 वर्ष की आयु में ही यशोधरा से हो गया था और इन्होंने एक पुत्रों को जन्म दिया था जिसका नाम राहुल था, राजा का पुत्र होने के बावजूद भी इनका राजपाट में कोई मन नही लगता था यह एकांत रहना पसंद करते थे और कहा जाता है कि गौतम बुद्ध विष्णु लोक से आई हुई एकात्म थी जो की एक सामान्य इंसान से ऊपर होता है,

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