भोपाल गैस त्रासदी कैसे हुई थी, 2,3 December bhopal gas kand

3 दिसंबर 1984 को भोपाल में मिथाइल आइसोसायनाइड गैस रिसाब कैसे हुआ जाने,

भोपाल गैस त्रासदी कैसे हुई थी – आज से करीब 37 साल पहले 3 दिसंबर की रात 12:00 भोपाल के जंक्शन रेलवे स्टेशन पर रेलवे के दो अधिकारी एचएस भुर्वे और गुलाम दस्तगीर अपनी रात ड्यूटी कर रहे थे, 1 घंटे बाद करीब 1:00 बजे मुंबई एक्सप्रेस भोपाल के जंक्शन पर पहुंचती है जिसके लिए गुलाम दस्तगीर अपनी केबिन से बाहर निकलते हैं, और निकलते ही उनकी आंखों में जलन और गले में खराश होने लगती है वह अपने सीनियर धुर्वे को यह बात बताने के लिए ढूंढते हैं मगर फिर उन्हें दिखाई देता है कि उनके सीनियर जमीन पर पड़े हैं और जब उनके पास जाकर देखा तो उनकी मौत हो चुकी थी, दस्तगीर को अंदाजा लग जाता है कि हुआ क्या है, दरअसल भोपाल के स्टेशन से एक दो किलोमीटर दूर एक फैक्ट्री थी यूनियन कार्बाइड की वहा से लगभग 45 टन मिथाइल आइसोसायनाइड गेस लीक हो जाती है, और इस गैस के लीक होने से लोगों की सांस फूलना बॉडी में जलन होना आंखों से आंसू आना जैसी समस्या हो जाती है ऐसे में स्टेशन पर जो मुंबई एक्सप्रेस आई थी वह यात्रियों से भरी थी और पहले से तय टाइम के मुताबिक ट्रेन को स्टेशन पर 20 मिनट और रुकना था और रात मे स्टेशन पर उस टाइम पर सबसे सीनियर आदमी दस्तगिरि थे तो उन्होंने ट्रेन मे बैठे यात्री को कोई नुकसान ना हो इसलिए पहले से तय किया गया ट्रेन के टाइम को अचानक बदलने का फैसला किया और स्टेशन पर सभी स्टाफ से कहा कि जल्दी-जल्दी ट्रेन को यहां से रवाना करें और इस नियम को तोड़ने की जिम्मेदारी उन्होंने अपने ऊपर ली, ट्रेन में उस टाइम पर जो भी यात्री थे सब की खिड़की बंद थी, आधी रात को हादसा हुआ था तो उस टाइम पर भोपाल शहर के सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे लेकिन उसके बाद भी लोगों को कहीं समस्या होने लगी जिसकी वजह से कई लोग अपने घर से बाहर निकल कर दूसरी जगह जाने लगे जिन लोगों के पास अपनी गाड़ियां नहीं थी वह स्टेशन पर आने लगे इसी तरह स्टेशन पर बहुत ज्यादा पब्लिक जमा होने लगी, लेकिन उससे भी ज्यादा भीड़ मचने लगी भोपाल के अस्पताल में जिस फैक्ट्री से गैस लीक हुई थी उससे करीब 4 किलोमीटर दूर है भोपाल का हमीडिया हॉस्पिटल जहां पर की पहला मरीज अस्पताल पहुंचता है और वहां जाकर अपनी समस्या बताता है, हमीदिया अस्पताल में उस टाइम पर टोटल 1200 वेट की व्यवस्था थी लेकिन धीरे-धीरे अचानक हॉस्पिटल में आधी रात 2 बजे तक 4000 लोग अपना इलाज करवाने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं, एक समस्या तो यह है कि अचानक इतने लोग एक साथ बीमार पड़ जाते हैं तो उनकी इलाज की व्यवस्था न हो पाना और दूसरी बड़ी समस्या यह थी कि उस टाइम पर डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे थे आखिर हो क्या गया है क्योंकि सारे स्वस्थ व्यक्तियों को अचानक आंखों में जलन होना, आँसू आना दम घुटना चालू हो गया था, जिससे कि डॉक्टर नहीं समझ पा रहे थे कि ऐसा क्यों हो रहा है, क्योंकि आधी रात को उस टाइम पर जानकारी नहीं मिल पाई थी की फैक्ट्री से कोई जहरीली गैस लीक हुई है जिसके कारण इतने लोग बीमार हो रहे हैं,

आधी रात को किस तरह मालूम किया गया

और रात के time पर ही कुछ डॉक्टर फैक्ट्री पर कॉल करते हैं और वहां मालूम करते की क्या हुआ है लेकिन कंपनी की मेडिकल ऑफिसर कहते कि यह गैस कोई ज्यादा जहरीले नहीं है अगर बायचांस लीक होने के बाद इसकी समस्या भी होगी तो केवल मरीज की आंखों पर गीली पट्टी बांध देने से ठीक हो जाएगा और जो कि यह जानकारी गलत थी, क्योंकि उसे जहरीली गैस का इलाज कुछ अलग ही था, और उस टाइम पर भोपाल के एसपी जब अपने कंट्रोल रूम पहुंचते हैं तो देखते हैं उनके सारे स्टाफ में कोई खास रहा है तो किसी की आंखों में जलन हो रही है और sp के द्वारा भी फैक्ट्री पर कॉल किया जाता है की फैक्ट्री में कुछ हुआ है क्या तो वहा से जवाब मिलता है कि यहां पर सब ठीक है फिर बाद में दुवारा कॉल करने पर फैक्ट्री वाले स्टाफ बोलते की हमें नहीं पता सर एक्चुअल में क्या समस्या हो गई है,

भोपाल गैस त्रासदी 3 दिसंबर 1984

3 दिसंबर की रात भोपाल में लीक हुई मिथाइल आइसोसायनाइड गैस कांड को देश की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना माना जाता है, क्योंकि उस टाइम पर भोपाल की आवादी 8.5 लाख थी जिनमें से करीब 5:५0 लाख से ज्यादा लोग जेहरिलि गैस की चपेट में आए थे और बीमार हुए थे जिसमें भी मोटे-मोटे नुमान के मुताबिक 15 ,16000 लोग मारे गए थे और जो लोग गैस की चपेट में आ गए थे और बाद में इलाज से ठीक तो हो गए लेकिन बाद में इनमें से कई सारे लोगो मे कोई अंधेपन का, कोई सांस फूलने,तो कोई किसी बीमारी का शिकार हो गया, और शुरुआत में जिनकी कहानी बताई थी गुलाम दस्तगीर की जिनोने रेलवे प्लेटफार्म पर कई लोगों की जान बचाई उनमें उनकी भी जान तो बच गई थी लेकिन उनको अपनी जिंदगी के बाकी साल मैं कई दिन अस्पताल में गुजारने पड़े और 2004 में उनकी मौत हो गई थी,

मिथाइल आइसोसायनाइड गैस लीक कैसे हुई थी

प्लांट से गैस लीक होने की सूचना जब मालूम पड़ गई और आधिकारिक तौर पर इस पर यह रिपोर्ट बताई गई की, फैक्ट्री के अंदर प्लांट को ठंडा करने के लिए जो पानी का इस्तेमाल होता है उसमें मिथाइल आइसोसायनाइड गैस मिला हुआ था और इन दोनों के मिश्रण से टैंक के अंदर से गैस उत्पन्न होने लगी और प्लाट नंबर सी के 610 नंबर टैंक के अंदर ज्यादा प्रेशर बनने लगा, टैंक के के ढक्कन पर गैस ज्यादा दबाव बनाने लगी और उस टैंक से और टैंक की पाइप लाइन से गैस का रिसाब होने लगा, और यह गैस उस टाइम आधी रात में आधे भोपाल शहर में फैल गई, जिससे कि लोग बीमार होना चालू हो गए थे

कौन सी कंपनी से गैस लीक हुई थी

जिस कंपनी की फैक्ट्री से भोपाल में गैस लीक हुई थी उसका नाम था यूनियन कार्बाइड कंपनी, जो की एक अमेरिकी व्यक्ति वारेन एंडरसन की थी, और गैस लीक होने के तीन दिन बाद 6 दिसंबर को रेंट इंडक्शन अमेरिका से दिल्ली आए और फिर वहां से भोपाल आए जहां पर कि उनको अधिकारियों के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बाद में उनका अमेरिका जाने की परमिशन दे दी गई और उसके बाद वह दोबारा कभी भारत लौटकर नहीं आया, उसके बाद 2014 में उसकी स्वाभाविक रूप से मौत हो गई थी,

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