राम मंदिर अयोध्या के पुजारी कौन है, राम की मूर्ति काली क्यों है

राम मंदिर अयोध्या के पुजारी कौन है, राम की मूर्ति काली क्यों है – 500 सालों के बाद दोबारा मंदिर बनने के बाद भगवान राम की स्थापना तो हो गई लेकिन भगवान राम की पूजा करने वाला सबसे बड़ा पुजारी कौन है आखिर कौन से पंडित को भगवान राम की पूजा करने की जिम्मेदारी दी गई है और भगवान राम की मूर्ति का रंग काले क्यों है शायद कुछ लोग नहीं जानते होंगे की मूर्ति का रंग काला क्यों है और जो व्यक्ति भगवान राम की पूजा करने वाला में पंडित है उसको कितनी तनक दी जाएगी और उसका चुनाव किस तरह किया गया और उसका नाम क्या है यह सारी बातें जानी जिसके लिए वीडियो पर क्लिक करके पूरा देखिए,

राम मंदिर अयोध्या का पुजारी – पहले बात करते हैं कि कौन से पंडित का चुनाव किया गया है और बाद में बताएंगे कि भगवान राम की मूर्ति का रंग काले क्यों है, राम मंदिर के उद्घाटन करने के बाद उसकी पूरी दुनिया के लिए दर्शन करने के लिए खोल दिया गया है और भगवान राम की पूजा करने के लिए एक 23 साल के पंडित का चुनाव किया गया है और उस पंडित का नाम है मोहित पांडे जो की वास्तविक रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं और उन्होंने गाजियाबाद से पंडित आई की पढ़ाई की है और बाकायदा उनका परीक्षण करने के बाद उनका चुनाव किया गया है कि वह भगवान राम की पूजा अर्चना और सेवा करने का कार्य करेंगे उनका चुनाव सहायक पंडित के रूप में किया गया है, जिस तरह लोग पहले 15वीं और फिर 17वीं पास करते हैं इस तरह मोहित पांडे ने भी पंडिताई में मास्टर से कर रखा है और बाकायदा उनको मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए हर महीने तनक दी जाएगी अब आपके मन में सवाल आएगा कि उनकी तनक कितनी होगी तो मोहित पांडे को हर महीने राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से ₹30000 से लेकर 35 हजार के बीच में तनका दी जाएगी, मोहित पांडे का चुनाव इस तरह किया गया है जैसे कि किसी नौकरी को पाने के लिए पहले आवेदन किया जाता है इस तरह राम मंदिर का पुजारी बनने के लिए 3000 पंडितों ने आवेदन दिया था पहले इनके शिक्षक और उनके अनुभव के आधार पर परीक्षा लेकर 200 पंडितों को चुना गया उसके बाद मौखिक इंटरव्यू के लिए 50 टॉप पंडित को चुना गया और उन सभी पंडितों में से मोहित पांडे ने टॉप किया था पहले नंबर पर आए थे इसलिए मोहित पांडे का चुनाव कर लिए गया और भगवान राम की पूजा करने का जिम्मा सोपा गया, मोहित पांडे का चुनाव पहले से मौजूद अयोध्या के तीन बड़े महात्मा पंडितों ने किया है और इसके लिए मोहित पांडे के साथ जिन-जिन लोगों को छोटे पंडित आई कार्य के लिए चुना है उनको सबको ट्रेनिंग के बाद पूजा अर्चना का काम उनसे करवाया जा रहा है,

और अब आगे बात करते हैं कि भगवान राम की मूर्ति काली क्यों है देखिए इसके पीछे विशेष कारण है, राम लला की मूर्ती को शिला पत्थर से तैयार किया गया है, जिसको कृष्ण शिला के बोलते है, यही कारण है कि राम लला की मूर्ती काले रंग की है, जिसे हम श्यामल भी कहते हैं। इस काले पत्थर के अपने कई गुण भी हैं।

और वाल्‍मीकि रामायण में भगवान राम के जिस रूप के बारे में बताया गया है, उसमें उन्हें श्यामवर्णी, बेहद सुंदर, कोमल और आकर्षक बताया है। इसलिए रामलला की मूर्ती का रंग श्यामल रखा है, दरअसल, रामलला की पूजा के समय उनका दूध से अभिषेक किया गया। अब इस पत्थर के गुण के कारण दूध में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा। इस दूध को पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी नहीं है। इस पत्थर का हजार साल तक कुछ भी नहीं बिगड़ता है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा।

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