रावण को नाम किसने दिया था, रावण के बारे में फैक्ट इनफॉरमेशन

रावण को नाम किसने दिया था, रावण के बारे में फैक्ट इनफॉरमेशन – ₹10 वाला दशानन रावण जो कि स्वयं भगवान की पत्नी को अपहरण करके ले आया और स्वयं राम भगवान से युद्ध लड़ा जो रावण भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त था जिस रावण से स्वर्ग के सारे देवता डरते थे और स्वयं यमराज उसके प्राण नहीं ले सकते थे उसने यमराज को भी पराजित किया था उस रावण के बारे में आश्चर्यजनक बातें और रावण को रावण नाम किसने दिया ऐसी बातें जानने के लिए वीडियो क्लिक करके पूरा देखिए चैनल सब्सक्राइब करिए,

रावण नाम किसने रखा था – जानकारी के लिए आपको बता दें रावण का राम नाम रावण स्वयं भगवान शिव ने रखा था रावण के मन मे इच्छा थी कि वह भगवान शिव को लंका में स्थानांतरित करते जिसके लिए उसने पूरे कैलाश पर्वत को उठाया और लंका में ले जाने लगा लेकिन भगवान शिव ने अपने एक पर को पर्वत पर रखा जिसमें भगवान शिव के पैर के अंगूठे से रावण की एक उंगली दब गई जिससे कि रावण पीड़ा से बहुत चिल्लाया था, इसलिए रावण ने शिव तांडव स्त्रोतम प्रदर्शन शुरू कर दिया, भगवान शिव उसके तांडव से प्रसन्न हुए और स्वयं शिव भगवान के द्वारा उसको रावण नाम दिया गया था

रावण के 10 सिरों का मतलब क्या था – रावण के जो भी 10 सर थे उन 10 सिरों का मतलब रावण के अलग-अलग गुणों से था, उसके दस सर थे काम (हवस), क्रोध (गुस्सा) मोह (भ्रम), लोभ (लालच), मादा (गौरव), विद्वेष (ईर्ष्या), मानस (मन), बुद्धि (ज्ञान), चित्त (इच्छापत्र), और अहंकार (अहंकार) – यह सब गुड़ मिलकर दस सि‍र बनाते हैं। और इसीलिए रावण के पास ये सब गुण थे।,

रावण का जीवन केवल नाभि में था – रावण ने एक बार ब्रह्मदेव की कठोर तपस्या करके उनको प्रसन्न किया था और उनसे पूरे जीवन अमर रहने का वरदान मांगा था लेकिन ब्रह्मदेव ने उसको अमर होने का वरदान तो नहीं दिया लेकिन रावण को ऐसा वरदान मिल गया था कि उसके पूरे शरीर पर किसी तरह से कोई प्रहार किया जाए कितना ही बड़ा शास्त्र रावण पर जलाया जाए तब भी उसका बाद नहीं होगा उसका जीवन केवल उसकी नाभि में रहेगा जब तक कोई उसकी नाभि पर प्रहार नहीं करेगा तब तक उसकी मृत्यु नहीं होगी इसीलिए रावण को पराजित करने के बाद भगवान राम ने उसे पर कई प्रहार किया तब भी रावण को कोई असर नहीं हो रहा था इसीलिए भगवान राम ने विभीषण के कहे अनुसार उसके नाभि पर प्रहार किया था उसके बाद ही रावण की मृत्यु हो गई थी,

रावण पुष्पा विमान कहां से लाया था – कहा जाता है कि रावण ने कुबेर को लंका से हटाने के बाद लंका पर पूरा अधिकार जमा लिया था, और धन के देवता कुबेर के पास उड़ने वाला पुष्प विमान था जो कि रावण ने उनसे छीन लिया था और रावण उसके द्वारा ही सारी जगह आवागमन करता था, और पुराणों में ऐसा भी वर्णित है कि रावण का सर्वनाश करने के बाद भगवान राम और माता सीता पुस्तक विमान के द्वारा ही अयोध्या वापस लौटकर आए थे

लंका के बारे मे इनफॉरमेशन और क्या लंका सोने की थी – रिसर्च के अनुसार रावण की लंका श्रीलंका में ही थी, माली, सुमाली और माल्यवान नामक तीन दैत्यों द्वारा त्रिकुट सुबेल पर्वत पर बसाई लंकापुरी को देवों और यक्षों ने जीतकर कुबेर को लंकापति बना दिया था। रावण की माता कैकसी सुमाली की पुत्री थी। अपने नाना के उकसाने पर रावण ने अपनी सौतेली माता इलविल्ला के पुत्र कुबेर से युद्ध की ठानी, परंतु पिता ने लंका रावण को दिला दी तथा कुबेर को कैलाश पर्वत के आसपास के त्रिविष्टप क्षेत्र (तिब्बत) में रहने के लिए कह दिया, कुबेर ने लंका पर राज कर उसका विस्तार किया था। रावण ने कुबेर से लंका को हड़पकर उस पर अपना शासन कायम किया। ऐसा माना जाता है कि लंका को भगवान शिव ने बसाया था। भगवान शिव ने पार्वती के लिए पूरी लंका को स्वर्णजड़ित बनवाया था।

रावण का विवाह कैसे हुआ – कुबेर को बेदखल कर रावण के लंका में जम जाने के बाद उसने अपनी बहन शूर्पणखा का विवाह कालका के पुत्र दानवराज विद्युविह्वा के साथ कर दिया। उसने स्वयं दिति के पुत्र मय की कन्या मन्दोदरी से विवाह किया, जो हेमा नामक अप्सरा के गर्भ से उत्पन्न हुई थी। माना जाता है कि मंदोदरी राजस्थान के जोधपुर के निकट मन्डोर की थी मंदोदरी से रावण को पुत्र मिले- इंद्रजीत, मेघनाद, महोदर, प्रहस्त, विरुपाक्ष भीकम वीर। ऐसा माना जाता है कि राम-रावण के युद्ध एक मात्र विभिषण को छोड़कर उसके पूरे कुल का नाश हो गया था।,

हमने आपको इस वीडियो में रावण के बारे में कुछ फैक्ट बातें बताइए

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