शाओलिन मोंक की ट्रेनिंग कैसे होती है, Shaolin monk kitne danger hote he

शाओलिन मोंक की ट्रेनिंग कैसे होती है – आपने जरूर कभी ना कभी शाओलिन मोंक के बारे में सुना होगा और यह भी मालूम होगा कि यह लोग कितने खतरनाक होते हैं बचपन में ही यह साउंड इन मूंग इतने डेंजरस बन जाते हैं कि बड़े से बड़ा आदमी उनके सामने टक्कर नहीं ले सकता है, दुनिया में हर कोई व्यक्ति चाहता है कि वह बहुत ज्यादा खतरनाक बने उसका मुकाबला कोई दूसरा व्यक्ति ना कर सके उसके लिए वह बहुत कड़ी मेहनत करता है अपनी बॉडी बनाता है फाइटिंग सीखना है जगह-जगह जाकर ट्रेनिंग भी लेता है लेकिन कहां जाता है कि शाओलिन मोंक उन लोगों में से होते हैं जिनका सामना कोई भी नहीं कर सकता अगर आप नहीं जानते हो कि शाओलिन मूंग क्या होते हैं और भी किस तरह की ट्रेनिंग लेकर इतनी खतरनाक बन जाते हैं तो जानने के लिए वीडियो आगे तक पूरी देखिए,

शाओलिन मोंक की ट्रेनिंग कैसे होती है

दोस्तों शाओलिन मूंग उन लोगों में से होते हैं जिनकी ट्रेनिंग बचपन से ही शुरुआत हो जाती है केवल 5 साल का होने पर ही इनको इनके ट्रेनिंग सेंटर में भर्ती करवा दिया जाता है ताकि यह बचपन से ही बहुत बड़े फाइटर और खतरनाक बन सके क्योंकि बचपन में हाथ पैर लूज होते हैं उनको ऊपर नीचे आगे पीछे किसी भी तरफ मोड़ने में आसानी होती है और बचपन से ही उनके हाथ पैरों को चारों तरफ घूमने हाथों के बाल खड़े होने इन सब की ट्रेनिंग चालू कर दी जाती है, और इनका बचपन में ही तरह-तरह की एक्टिविटीज करवाई जाती है ताकि बचपन में ही इन लोगों में कराटे फाइटिंग इन सब के गुण आ जाए और छोटे पान में ही इन लोगों कड़ी मेहनत की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि शुरुआत से ही यह लोग दर्द सी सीख जाएं और आगे जब भी कोई बड़ा काम करे तो उसमें किसी तरह की दिक्कत ना हो,

शाओलिन मूंग की ट्रेनिंग के टाइम पर उनकी पूरी बॉडी पर डंडे से तेजी से बाहर किया जाता है ताकि उनकी बॉडी मजबूत बन सके और जब भी इन पर इस तरह कोई हमला हो तो इनका कोई असर ना हो, जैसे कि आमतौर पर सभी लोग दोनों हाथों से पुशअप्स लगते हैं तो उनकी ट्रेनिंग के टाइम पर इनको पुशअप्स लगाने में इतना बेहतर बना दिया जाता है कि यह हाथों के बदले अपने दो उंगलियों से पुश उप्स लगा सकते हैं, और उनके हाथों और उंगलियों को मजबूत करने के लिए भजन वाले गोल रोलर के बीच में उनके हाथों और उंगलियों को फसाया जाता है और उन रोलर को आपस में चिपकाए जाता है ताकि उनकी उंगलियों और हाथों की नसें मजबूत हो सके,

हाथ और पैरों से फाइटिंग करना सिखाया जाता है

शाओलिन मूंग को उनके हाथों और पैरों से खतरनाक फाइटिंग करना भी सिखाया जाता है और उनकी फाइटिंग स्पीड इतनी तेज करवा दी जाती है कि यह पलक झपकते ही किसी पर वार कर देते हैं और सामने वाले को मालूम ही नहीं पड़ता शुरुआत में इनको हाथों और पैरों से चारों तरफ लड़ाई कर सके यह सिखाया जाता है और बाद में इनको हथियारों के साथ लड़ाई कर सके जैसे की तलवारबाजी सब कुछ सिखाया जाता है और उनके हाथ पैरों से लड़ाई करने का तरीका बहुत ही तेज होता है

और इसके अलावा शाओलिन मूंग को सीधा खड़ा करके उनके हाथों में बाल्टी में पानी या रेत भर के खड़ा करवा दिया जाता है जी और उनको इस तरह काफी देर तक खड़ा होने के लिए मजबूर किया जाता है ताकि वह दर्द को महसूस करने की आदत डाल सके

और शाओलिन मूंग की पूरी ट्रेनिंग 6 से 8 साल में होती है इतने टाइम में यह पक्के फाइटर बन जाते हैं यह शाओलिन मोंक अगर इतने टाइम तक अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं तो इनका शरीर पूरा पत्थर बन जाता है इन पर किसी तरह से कोई व्यक्ति हावी नहीं हो सकता और इतनी डेंजर बनने के बाद यह किसी को भी हरा देते हैं

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