संडे को छुट्टी क्यों रखी जाती है, भारत में संडे की छुट्टी कब से रखी जाती है,

भारत में संडे की छुट्टी की शुरुआत कैसे हुई , the history of sunday holiday

संडे को छुट्टी क्यों रखी जाती है – हर व्यक्ति के लिए पूरे सप्ताह कम करने के बाद संडे आता है जो कि आराम का होता है उस दिन तमाम तरह के सरकारी और प्राइवेट सभी ऑफिसेज बंद रहते हैं हर व्यक्ति को छुट्टी मिलती है लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा कि संडे की छुट्टी की शुरुआत कैसे हुई और कब से हुई चलिए जानते हैं इससे पहले और अच्छी वीडियोस पाने के लिए लाइक करके फॉलो करेगा,

संडे की छुट्टी के इतिहास के बारे में ऐसा कहा जाता है की आजादी से पहले जिस टाइम पर की अंग्रेज इंडिया में मौजूद थे, और उनके द्वारा इंडिया में सारे वर्कों के द्वारा से काम करवाया जाता था और हफ्ते में हर संडे अंग्रेज लोग चर्च जाया करते थे तब स्कूलों और कॉलेज की छुट्टी तो 1843 से ही चली आ रही थी लेकिन इंडिया के वर्कोंरो को उस दिन भी काम करना होता था उन्हें कोई छुट्टी नहीं मिलती थी, तो उस टाइम पर मजदूर संघ के नेता नारायण मेघा जी लोखंडे ने अंग्रेजी हुकूमत से इस बात की मांग की और करीब 5 साल से ऊपर संघर्ष करने के बाद 10 जून 1890 को अंग्रेजों की तरफ से इंडिया के लोगों के लिए भी छुट्टी घोषित कर दी गई तभी से लेकर आज तक संडे की छुट्टी चली आ रही है,

लेकिन जिस टाइम पर मजदूर संघ के नेता नारायण मेघा जी लोखंडे ने अंग्रेजों से संडे की छुट्टी उनके मजदूरों के लिए करवाने की बात कही थी अंग्रेज मानने को तैयार नहीं थे उन्होंने मना कर दिया था और इस बात के लिए अंग्रेजी नेता ने काफी संघर्ष किया और कई सालों तक अपनी मांग को बनाए रखा और उसके लिए निरंतर प्रयास करते रहे जिसके चलते अंग्रेजी सरकार की तरफ से उनको भी संडे की छुट्टी दी गई तभी से 1890 के टाइम से अभी तक रविवार को छुट्टी मनाई जाती है

Disclaimer

तो इस आर्टिकल के माध्यम से आपको मालूम पड़ गया होगा कि संडे की छुट्टी का इतिहास क्या है और किसके द्वारा शुरू की गई और कब से की गई

संडे की छुट्टी की शुरुआत करने की डेट

10 जून 1890

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