सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर महत्वपूर्ण बातें, Sardar patel punyatithi Thought

सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर महत्वपूर्ण बातें सरदार वल्लभभाई पटेल जो कि भारत देश के सबसे पहले गृहमंत्री थे और वर्तमान में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा गुजरात के नर्मदा पुरम में है जो की भारत सरकार के द्वारा 3000 करोड रुपए लगाकर बनवाई गई है तो जानिए सरदार पटेल को इतना सम्मान क्यों दिया जाता है उन्होंने अपने जीवन में भारत देश के लिए भारत देश के लोगों के लिए क्या-क्या भूमिका निभाई, उन्होंने बिना किसी अपने लालच मोह के देश के लिए क्या-क्या किया और उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें भी जानीए है

सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते लेकिन क्यों पीछे हटे जाने

सरदार पटेल अपने महत्वपूर्ण बड़े-बड़े काम और अपनी पहचान और ब्रिटिश शासन के सामने राजनीति के क्रांतिकारी बनकर जो भूमिका निभाई उसके लिए देश के पहले प्रधानमंत्री होते और वह बनते भी लेकिन बी गांधी जी की इच्छा का सम्मान करते थे और उनके कहने पर बी पीछे हट गए और पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री बना दिया गया , और प्रधानमंत्री के बाद सबसे बड़ा पद देश का गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को ही दिया गया, इसके अलावा उनको उसे टाइम के सारे रियासतों के मंत्री भी बनाया गया था और उनके सम्मान के लिए उनकी मृत्यु के 40 साल बाद 1991 में उनका भारत के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया था, जो कि उनके परिवार वालों को दिया गया था,

सरदार वल्लभभाई पटेल के शुरुआती दिन

आपको जानकर हैरानी होगी कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी 22 साल की उम्र में केवल दसवीं क्लास पास की थी और उनको अपने स्कूली टाइम से ही अन्य बिल्कुल पसंद नहीं था सरदार वल्लभ भाई पटेल का मन पढ़ाई करके वकील बनने का था क्योंकि उन्होंने सभी तरह के व्यक्तियों के साथ न्याय होता रहे और उनको अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना अच्छा लगता था इसलिए उनके मन में वकील बनने का ख्याल आया था, और उन्होंने केवल किताबों के द्वारा सेल्फ स्टडी करके वकालत की परीक्षा दी और उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई किसी की फाइनेंशली मदद से इंग्लैंड में जाकर की थी और उसमें उत्तीर्ण भी हो गए थे, लेकिन उन सब के बाद भी उन्होंने पैसे कमाने की जगह 1913 मे भारत लौट आए और अहमदाबाद से अपनी वकालत शुरू कर दी और अपने साथियों के कहने पर 1917 सैनिटेशन कमिश्नर का चुनाव लड़ा और उसमें उत्तीर्ण हुए,

गांधी जी का सत्याग्रह में सरदार पटेल ने साथ दिया था

मोहनदास करमचंद गांधी ने चंपारण सत्याग्रह किया था जिससे कि सरदार पटेल पहले से प्रभावित थे, और सन 1918 में किसानों के द्वारा ब्रिटिश शासन से कर माफ करने की मांग की गई क्योंकि उसे टाइम पर सूखा पड़ चुका था जिससे कि किस की आमदनी नहीं हुई थी लेकिन अंग्रेज इस बात को मानने को तैयार नहीं थे जिसको लेकर गांधी जी ने किसानों का मुद्दा उठाकर संघर्ष और हड़ताल चालू कर दिया लेकिन उनको इसके लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था इसीलिए वे किसी समझदार अच्छे व्यक्ति को देख रहे थे जो कि इस संघर्ष का नेतृत्व कर सके जिसके लिए सरदार पटेल अपनी इच्छा से चलकर आ गया और उन्होंने इस संघर्ष को संभाला था

देश के पहले गृह मंत्री बनकर क्या महत्वपूर्ण काम करना था

आजादी के बाद जब सरदार पटेल गृहमंत्री बने उसे टाइम पर देश में रियासतें चलती थी तो सरदार पटेल को सारी रियासतों को राज्यों में मिलना था जो काम उन्होंने बिना किसी संघर्ष और खून खराबे को देश में करके दिखाया केवल उसे टाइम पर हैदराबाद की रियासत मिलने के लिए तैयार नहीं थी जिसके लिए उनका ऑपरेशन पोलो चलना पड़ा और वहां पर सी भेजी थी तो उसको भी मिलकर भारत का एकीकरण कर दिया था देश की पूरी रियासतों को राज्यों में मिलना एक बहुत बड़ा काम था जो उन्होंने बखूबी करके दिखाया था जिसके लिए सरदार पटेल को लोह पुरुष भी कहा जाता है, क्योंकि रियासतों में केवल उनके राजाओं का शासन चलता था उनके सारे नियम कानून उनके आदेश के अनुसार ही पूरी रियासतों में काम किया जाता था जिसके लिए कोई भी राजा अपनी रियासत को भारत सरकार को सौंप दे और पूरे नियम कानून अधिकार भारत सरकार को दे दे जो की बहुत बड़ा काम था लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने सारे रियासतों को राजाओं से शांतिपूर्ण तरीके से भारत सरकार मैं मिलवा कर भारत एकता का निर्माण किया था

सरदार पटेल ने बिना कुछ कमाए जीवन छोड़ा था

जिस टाइम पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आखिरी सांस ली उनके पास अपने खुद का मकान तक नहीं था और उनकी मृत्यु मुंबई में 15 दिसंबर 1950 में हुई थी और उसे टाइम पर उनके बैंक खाते में केवल ₹250 थे उन्होंने इतने बड़े पद पर रहने के बाद भी अपने लिए कोई कमाई नहीं कि केवल देश की सेवा करते-करते दुनिया को अलविदा कह दिया था,

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