16 दिसंबर 1971 विजय दिवस की फुल स्टोरी, भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971

16 दिसंबर 1971 विजय दिवस की फुल स्टोरी आज से करीब 52 साल पहले 16 दिसंबर 1971 को भारत और पाकिस्तान का खतरनाक बाल युद्ध हुआ था जिसमें कि पाकिस्तान की 93000 सैनिकों ने घुटने टेक कर हार मान ली थी भैया बस करो हमारे बस की नहीं तो यानी इस युद्ध की शुरुआत कैसे हुई थी और किस तरह भारत की फोर्सज ने पाकिस्तान के सैनिकों की चटनी चटा दी थी क्योंकि धूल चट्टी है तो बहुत लोग बोलते हैं तो अब करते रते हैं पूरी छानबीन तो आगे तक बने रहिए

1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू होने का क्या कारण था

1970 के टाइम में पाकिस्तान आम चुनाव हुए जिसमें पाकिस्तान पीपल पार्टी के नेता जुल्फिकार अली भुट्टो और पूर्वी पाकिस्तान एरिया के शेख मुजीबुर रहमान आमने-सामने हुए जिसME की शेख मुजीबुर रहमान ने बहुमत हासिल करने का प्रमाण देते हुए सरकार बनाने का दावा किया लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता जो की उस टाइम सत्ता मे थे जुल्फिकार अली भुट्टो को बहुमत की बात स्वीकार नहीं थी जिसकी वजह से पूर्वी पाकिस्तान और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी जो कि पश्चिम दोनों में तनाव बढ़ गया, और पूर्वी पाकिस्तान की तरफ से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया जिस्म की पूर्वी पाकिस्तान के नेता शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया, अपने नेता की गिरफ्तारी होने से पूर्वी पाकिस्तान के लोग भड़क गए और पाकिस्तान पीपल पार्ट की सत्ता के खिलाफ यथा विरोध करना शुरू कर दिया ऐसे में जुल्फिकार अली के द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में सी भेजी गई और उन लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया,

अपने बचाव में पूर्वी पाकिस्तान ने भारत में शरण में शुरू कर दिया

तो फिर अपनी जान बचाने के लिए अपने बच्चा में पूर्वी पाकिस्तान के लोग भारत भाग कर आने लगे भारत के जो राज्य पूर्वी पाकिस्तान की सीमाओं से लगे थे उनमें शरण लेने लगे और इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी अनुमान के मुताबिक उसे टाइम पर अपना बचाव करने के लिए करीब 10 लाख लोग भारत में आ गए थे और उसे टाइम पर भारत में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी, लोग भाग कर आ रहे थे तो पाकिस्तान की तरफ से भारत के उन राज्यों में हमला करने की बात कही गई जिसमें की पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने शरण ली थी, और फिर 3 दिसंबर 1971 को पश्चिमी पाकिस्तान की तरफ से भारत के कई शहरों में आक्रमण करना शुरू कर दिया, जिसके जवाब में इंदिरा गांधी ने देश को यह जानकारी देते हुए अपनी तरफ से भी लड़ाई करने का ऐलान कर दिया, उसके बाद भारतीय वायु सेवा की तरफ से पाकिस्तान के पश्चिमी एरिया में अटैक कर दिए गए और 5 दिसंबर को भारत पाकिस्तान की सेनो में खतरनाक मुकाबला भी हुआ फिर 5 दिसंबर 1971 को ही पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को निशाना बनाते हुए भारतीय सेना ने बमबारी और अटैक कर दिए बहुत कुछ तबाह कर दिया जिससे कि पाकिस्तान को एक झटका लगा, इसी तरह 13 दिन चले इस युद्ध में पाकिस्तान की सेवा कमजोर कमजोर पड़ती गई हार का सामना करने लगी जिसकी वजह से 16 दिसंबर को पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी ने 16 दिसंबर को पाकिस्तान के 93000 सैनिकों के साथ भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, पाकिस्तान की सैनिकों में से 10000 सैनिकों को भारतीय सैनिकों के द्वारा रामगढ़ सैन्य छावनी में बंदी बनाकर रखा गया था, इसी तरह और सैनिकों को अलग-अलग जगह बंदी बनाकर रखा गया और फिर बाद में युद्ध के 8 महीने बाद अगस्त 1972 में शिमला समझौता होने के बाद इन सैनिकों को रिहा कर पाकिस्तान लौटा दिया गया था

भारत-पाकिस्तान युद्ध में कितने लोग मारे गए थे

1971 के टाइम में जो भारत और पाकिस्तान के बीच में युद्ध हुआ था उसमें उसमें दोनों जैसे की तरफ से कई लोग घायल और मृत्यु हो गए थे जैसे कि इसमें जीत भारत की हुई थी तो भारत की की ओर से लगभग 3000 सैनिक शहीद और 12000 के लगभग घायल हुए थे और पाकिस्तान के 8000 सैनिक मारे गए थे और 25 साल से ज्यादा लोग घायल हुए थे जिस टाइम पर पाकिस्तान ने घुटने टेक कर समर्पण किया था उसमें कई घायल सैनिकों का उपचार करवा कर भारतीय सेवा की तरफ से बंदी बना कर रख लिया गया था,

Disclaimer

सन 1971 में भारत-पाकिस्तान में युद्ध शुरू होने का क्या कारण था और पाकिस्तान की तरफ से कितने सैनिकों के साथ आत्म समर्पण किया गया था इन सब की जानकारी आर्टिकल में मेंशन की गई है

Leave a Comment